Wednesday, February 25, 2026

कार्तिक पुर्णिमा को गंगा में डुबकी लगाने से होता है मन की शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार

 

नरायनपुर, मीरजापुर। नरायनपुर क्षेत्र के अंतर्गत रायपुरिया घाट पर कार्तिक पुर्णिमा की एकादशी को मां गंगा के पवन घाट पर हजारों की संख्या में लोगों ने डुबकी लगाई और पाप से मुक्ति पाई अपने मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि मां गंगा में स्नान करने से मां गंगा व्यक्ति के पापों को हर लेती है और उसके मोक्ष प्रति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। कार्तिक मास को धार्मिक रूप से पवित्र माना जाता है और पुर्णिमा तिथि इस महात्व को और भी बढ़ा देता है। आध्यात्मिक रूप से मानना है कि मां गंगा सभी नकारात्मक ऊर्जाओं को का नाश कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन को भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार और त्रिपुरासुर के वध से भी जोड़ा जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दीपदान करने से भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। इसीलिए इस स्नान का महत्व और भी ज्यादा है।

इसीलिए दूरदराज के गांवों और बाजारों से श्रद्धालुगण जगह – जगह गंगा घाटों पर स्नान कर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु भरी मात्र उमड़ते हैं।

ऐसा ही प्रसिद्ध घाट नरायनपुर बाजार से लगा गांव रायपुरिया है, जो मां गंगा के पवित्र घाट बार बसा हुआ है। इस घाट पर हर साल हजारों की संख्या में भक्त एवं श्रद्धालुगण जुट कर गंगा में डुबकी लगाते हैं। इस बार भी कार्तिक पुर्णिमा की एकादशी को हजारों की संख्या में अनुमानतः लगभग एक लाख के आसपास भक्तों ने डुबकी लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो के लिए आशीर्वाद मांगा। साथ ही मां गंगा को माला – फूल, फल, सब्जी आदि अर्पण करने के साथ -साथ दीपदान कर मां गंगा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त किए।

इस अवसर पर सरदार पटेल वाहिनी की ओर से पवित्र स्नान करने वाले महिला एवं पुरुष भक्तगणों को कपड़ा बदलने के लिए अलग – अलग टेंट हाउस लगाया गया था और वाहिनी के सदस्यों द्वारा घाट पर लोगों की सुख समृद्धि हेतु हवन – पूजन किया गया। अदालहट थाना और नरायनपुर पुलिस चौकी के द्वारा सुरक्ष की पुख्ता इंतजाम किया गया था। हाइवे अंडरपासिंग से गंगा घाट तक जगह – जगह पुलिस बल के लोग बैठ कर निगरानी कर रहे थे। नाव वाले सुरक्षा की दृष्टि से नाव यात्रा करने वालों के लिए लाइफ जैकेट की व्यस्था किए हुए थे ताकि नदी में गिरने के पर पानी में न डूबे और उनकी जान बचाई जा सके। जो नाविक लाइफ जैकेट नहीं दे रहे थे उनके नाव को प्रतिबंधित कर दिया जाता था। बार – बार शांति और सुरक्षा हेतु अनाउंसमेंट किया जा रहा था। जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो सके।

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