नरायनपुर, मिर्जापुर। रानीबाग, स्थित पूर्वी होम्योहाल में एक गोष्ठी आयोजित कर विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि रिटायर्ड अध्यापक बाबूलाल यादव ने होम्योपैथी के जनक डॉ0 क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। इस मौके पर पूर्वी होम्योहाल के चिकित्सक डॉ0 अमरनाथ यादव ने गोष्ठी में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि आज 10 अप्रैल है, आज ही के दिन होम्योपैथी के जनक डॉ0 क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन का 1755 में जन्म हुआ था। डॉ0 सैमुअल के जन्मदिन को ही विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस उन्हें सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 10 अप्रैल को पूरी दुनिया में मनाया जाता है।

डॉ0 यादव का कहना है कि लोगों के अंदर एक भ्रम पैदा कर दिया गया है कि होम्योपैथी दवाएं धीमा इलाज करतीं हैं जबकि ऐसा नहीं है। दुनिया का सबसे तेज इलाज करने वाली दवाएं होम्योपैथ की ही हैं। जैसे यदि आपको सर दर्द हो रहा है तो एलोपैथ उसे ठीक करने में आधा घंटा लेता है तो होम्योपैथी मात्र 15 से 20 मिनट सरदर्द में सर दर्द ठीक कर देता है। यहां तक कि टूटी हुई हड्डी का ऑपरेशन एक सर्जन करता है जबकि उसी टूटी हुई हड्डी को सबसे तेजी से जोड़ने का काम यदि कोई दवा करता है तो वो होम्योपैथ की है न कि एलोपैथ की। डॉ0 यादव ने बताया कि मैने अपने 15 वर्ष के प्रैक्टिस में अनेकों ऐसे इलाज किए जो बड़े – बड़े डाक्टर और सर्जन के द्वारा वापस कर दिए गए थे। जब वे मरीज ठीक हो जाते तो मुझे यकीन ही नहीं होता कि होम्योपैथ में इतनी अच्छी दवाएं भी हैं जो लाइलाज मर्ज का भी इलाज करते हैं। होम्योपैथ के द्वारा असाध्य से असाध्य रोगों का इलाज किया जा सकता है। इसका शरीर पर कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं है। होम्योपैथी के माध्यम से केवल शरीर का ही नहीं व्यक्ति के आत्मा, मन और मस्तिष्क का इलाज संभव है, बशर्ते आपको विश्वाश होना चाहिए।
विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर डॉ0 एम लाला शांति पैथोलॉजी, चुन्नू भाई, मदन जी, गोलू, सन्नी केशरी, संतोष कुमार , दिनेश यादव आदि लोग उपस्थित रहे।
