नरायनपुर, मिर्जापुर। नरायनपुर पुलिस चौकी क्षेत्र के छोटा मिर्जापुर निवासी कल्लू प्रजापति के पिता की मृत्यु की जानकारी सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म फेसबुक से मिला।
29 मार्च, रविवार के दिन कल्लू प्रजापति के पिता विजय प्रजापति दरियापुर, जमुई स्थित शम्मो माता का दर्शन करने के लिए अकेले ही गए थे। वापसी में भरेठा में उनका निधन हो गया। पिता के निधन की खबर मिलते ही घर में मातम सा छा गया।
कल्लू प्रजापति से पूछने पर कि आप को आपके पिता जी के निधन की जानकारी कैसे मिली ?
तो कल्लू प्रजापति ने बताया कि मेरे एक रिश्तेदार ने जब पिता जी के मृत शरीर को सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म फेसबुक पर देखा तो उन्होंने लगभग ढाई बजे मुझसे फोन कर के पूछा कि आपके पिता जी कहां हैं, तो मैने उन्हें बताया कि पिता जी तो सुबह 9:00 बजे का दरियापुर, जमुई शम्मो माता का दर्शन करने हेतु गए हैं। कहिए क्या बात है? तो उन्होंने कहा कि अब वो जीवित नहीं रहे। मैने उनके मृत शरीर को फेसबुक पर देखा है, जल्दी से भरेठा पहुंच कर मृत शरीर को घर ले आओ। मैने तत्काल मेरे पड़ोसी राजेश चाचा को फोन किया जो कि ऑटो चलते हैं और उनसे पूछा आप कहां हैं तो उन्होंने ने कहा कि मैं कैलाहट हूँ। मैने उनसे कहा कि आप वहीं से मूड जाइए पिता जी का शव भरेठा में पड़ा हुआ है जल्द से अपने कब्जे में लीजिए और मैं भी पहुंच रहा हूँ। राजेश चाचा ने ऐसा ही किया। थोड़ी देर में मैं भी घटना स्थल पर पहुंच गया। पिता जी प्रतिवर्ष आज ही के दिन माता जी का दर्शन करने जाते रहे हैं। माता जी में उनकी बड़ी आस्था थी। कोई भी मन्नत माता से मांगते तो अवश्य ही पूरा होता था।
पिता जी के मृत्यु का क्या कारण था? पिता जी मेरे दिल के मरीज थे उन्हें कई बार दौरा पड़ चुका था और वे मूर्छा खाकर गिर चुके था। उनके दिल में ब्लॉकेज बन गया था। उनसे ऑपरेशन करने के लिया बराबर कहा जा रहा था पर वो कहते
” वो कहते जायदा हो अब का करके बा जवान करे क रहल सब कर चुकल हई, अब कोनो इच्छा नहीं बा। बस तू लोग मजे से रहा अउर हमके का चाही। जवान भगवान के मंजूर होई उ होबे करी के रोक सकला”
उनके पास दवा था, लेकिन लगता है वो पानी के अभाव में दावा नहीं खा सके जिस कारण उन्हें दिल का दौरा आया होगा और उनकी मृत्यु हो गई। क्योंकि मैने उनके शरीर को अच्छी तरह से देखा, शरीर में कहीं भी किसी प्रकार का चोट नहीं लग हुआ था। उनकी उम्र 67 वर्ष हो चुकी थी, शरीर से कमजोर भी हो गए थे। हालांकि पुलिस के लोगों ने मुझसे पोस्ट मार्टम करने हेतु ले जाने को कहा लेकिन जब मैने उनके शरीर में किसी प्रकार का घाव नहीं देखा तो मैं समझ गया कि उनको दौरा आया होगा तभी उनकी मृत्यु हुई होगी। इसीलिए मैने सोचा जब मृत्यु का कारण पता ही है तो पोस्ट मार्टम करने का क्या मतलब। लिखा – पढ़ी कर पिता जी के शव को घर ले आया।
वहीं राजेश का कहना है कि मुझसे पुलिस वालों ने कई सवाल किया। एक ही सवाल को घटना स्थल पर स्थित तीन पुलिस वाले थे तीनों ने बारी – बारी पूछा। जब वे मेरे सवालों से संतुष्ट हुए तभी मुझे विजय भइया के शव के छूने दिया। मैने भी उनको जवाब धड़ल्ले से दिया डरा नहीं पर मेरा धड़कन बढ़ गया था कि इतने पर भी मुझे शव नहीं मिला तो क्या होगा। पर माता जी की कृपा से सब कायदे से हो गया।
विजय प्रजापति को दो बेटे और तीन बेटियां हैं। सभी बच्चों की शादी कर चुके थे। अभी उनकी पत्नी जीवित हैं। वे अपने पुस्तैनी कारोबार मिट्टी का बर्तन बनाने का काम करते थे। उनके दोनों बेटे कल्लू और मल्लू भी मिट्टी का बर्तन बनाने का काम करते हैं। शाम को लगभग सात बजे शव दाह कर दिया गया।
