नरायनपुर, मिर्जापुर। पी एम श्री कंपोजिट विद्यालय परशुरामपुर नरायनपुर में वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर मुख्य अतिथि वरुण पटेल प्रबंधक इण्टर मीडिएट कॉलेज मठना एवं अपना दल विधान सभा अध्यक्ष ने दीप प्रज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर किया। तत्पश्चात विद्यालय के छात्राओं ने गणेश वंदना पर सुन्दर नृत्य की प्रस्तुति दी एवं अध्यापक आशीष कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि को माल्यार्पण कर स्वागत किया।
वार्षिक उत्सव के मौके पर विद्यालय के वे मेधावी छात्र – छात्राओं ने अपनी – अपनी कक्षाओं में स्थान लाने विद्यार्थियों

प्रथम स्थान लाने वाले विद्यार्थी तनवी पटेल कक्षा एक, श्वेता कक्षा दो, नैन्सी कक्षा तीन, कार्तिक कक्षा चार, प्रवीन कक्षा पांच, अनुराग कक्षा छः, सूरज कक्षा सात और आरुषि कक्षा आठ;
द्वितीय स्थान लाने वाले विद्यार्थी हिमांशी कक्षा एक, प्रिंस कक्षा दो सुनैना कक्षा तीन, इकरा कक्षा चार, आदर्श कक्षा पांच, सूफिया कक्षा छः, अन्नू कक्षा सात, और नंदनी कक्षा आठ;
वर्ष का सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी बालक वर्ग में रोहित चौहान कक्षा एक, ईशान कक्षा दो, किशन कक्षा तीन, रुद्र कक्षा चार, प्रशांत कक्षा पांच, आरिफ कक्षा छः, शिव कक्षा सात और आयुष कक्षा आठ तथा
बालिका वर्ग में नैन्सी पटेल कक्षा एक, आयशा कक्षा दो, अदिति कक्षा तीन, प्रांजलि कक्षा चार, उजैफा कक्षा पांच, चांदनी कक्षा छः, बेबी कक्षा सात और आकांक्षा कक्षा आठ को मुख्य अतिथि वरुण पटेल एवं अन्य अतिथियों ने पुरस्कृत कर सम्मानित किया।
बच्चे तालियों की गड़गड़ाहट से मेधावियों का स्वागत कर रहे थे।

मुख्य अतिथि अपने संबोधन में कहा कि आज मुझे शिक्षा के इस मंदिर में बुलाया गया इसे मैं अपने सबसे बड़ा सौभाग्य समझता हूँ। राजनीतिक आयोजनों में तो बहुत मौका मिलता है पर शिक्षा के मंदिर में बुलाहट बहुत कम होता है। मैं इसके लिए आप सभी गुरुजनों का दिल से आभारी हूँ।उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुशासन वह मूल मंत्र है जिसे आप अपनाकर जिंदगी के किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते हैं। अतः आप लोग अनुशासन में रहकर शिक्षा ग्रहण करें। अपने माता – पिता और गुरु का सम्मान करें और उन्हें प्यार करें तथा उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें। उनका आशीर्वाद आपको मामयाबी पाने में मदद करेगा। उनसे डाट खाने पर क्रोधित न हो बल्कि उस डाट को आशीर्वाद समझे। उन्होंने उदाहरण में कहा जब किसी पत्थर को छेनी और हथौड़ी से कटा जाता है तो पत्थर को चोट लगती है, उस चोट से जो पत्थर टूट जाता है वह बेकार हो जाता है। वह किसी काम का नहीं रह जाता और जो पत्थर नहीं टूटता वह एक सुंदर मूर्ति बन जाता है। इसी तरह विद्यार्थी और गुरु का संबंध होता है। जो विद्यार्थी डाट और पिटाई से भाग जाता है वह असफल रहता है और जो उसे प्रेरणा के रूप में लेता है वह अपने जीवन में अवश्य ही कामयाब होता है। मुझे उम्मीद है आप से भी अच्छे विद्यार्थियों की तरह मेरे बातों पर अमल करेंगे और जीवन में कामयाबी पाएंगे।
